झारखंड: CGL पेपर लीक का अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन

झारखंड: CGL पेपर लीक का अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन

CGL पेपर लीक का अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन: पर्दे के पीछे LIC एजेंट चला रहे थे सॉल्वर गैंग!

रांची: झारखंड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (JSSC CGL) के पेपर लीक मामले में सीआईडी (CID) की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। सीआईडी द्वारा अदालत में पेश की गई केस डायरी और पुख्ता साक्ष्यों ने साबित कर दिया है कि यह महज कुछ अभ्यर्थियों की नकल का मामला नहीं, बल्कि कई राज्यों और नेपाल तक फैला एक पेशेवर और संगठित सिंडिकेट था।

LIC एजेंट का नकाब, पीछे पेपर लीक का खेल

जांच एजेंसी के अनुसार, इस पूरे सिंडिकेट के दो मुख्य मोहरे संदीप कुमार और राजेश प्रसाद यादव बाहर से खुद को साधारण LIC एजेंट बताते थे। लेकिन इस नकाब के पीछे वे प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों को जाल में फंसाने का काम कर रहे थे। राजेश अभ्यर्थियों का संपर्क सेटिंग कराने वालों से करवाता था और बदले में मोटी रकम ऐंठता था। जांच में इनके पास से धर्मराज के हस्ताक्षर वाला एक ब्लैंक चेक और कुल ₹18.30 लाख के दो बियरर चेक (₹9.90 लाख व ₹8.40 लाख) बरामद हुए हैं। संदीप के खातों से सफल अभ्यर्थियों, उनके रिश्तेदारों और परीक्षा नेटवर्क से जुड़े लोगों के साथ भारी वित्तीय लेन-देन के सबूत भी मिले हैं।

नेपाल से बोकारो तक बनाए थे ‘रटाई सेंटर’

सिंडिकेट ने पेपर लीक कराने के बाद अभ्यर्थियों को उत्तर रटवाने के लिए बाकायदा पांच गोपनीय ठिकाने तैयार किए थे। अभ्यर्थियों को नेपाल के बीरगंज ले जाकर प्रश्न-उत्तर रटवाए गए। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर (सितुलपुर) और आसनसोल (नियामतपुर), तथा झारखंड के बोकारो (दुगदा) और बिहार की राजधानी पटना में भी छात्रों को इकट्ठा कर सवालों के जवाब रटने के लिए सुरक्षित अड्डे बनाए गए थे।